
गोटमार मेले की आराध्य नगरी में निखरा मंदिर, समाजसेवी प्रवीण चौहान बने मिसाल ,प्राचीन धरोहर को मिला नया रूप, चंडिका माता मंदिर में हुआ सौंदर्यीकरण
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश
पांढुरना: जिले की प्राचीन धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर चंडिका माता मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि यह पांढुरना नगर की उत्पत्ति और पहचान से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। 17वीं शताब्दी में आदिवासी गोंड शासक जाटबा राजा द्वारा अपने किले में कुलदेवी के रूप में स्थापित यह मंदिर आज भी अपनी प्राचीनता, गौरवशाली इतिहास और धार्मिक महत्ता को जीवंत बनाए हुए है।

मंदिर से जुड़ी जनश्रुतियों और परंपराओं के अनुसार, यहाँ विराजमान माँ चंडिका को विश्व प्रसिद्ध गोटमार मेला की आराध्य देवी माना जाता है। इसी आस्था के कारण सदियों से यह मेला निरंतर आयोजित होता आ रहा है, जो आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशिष्ट परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यह मेला केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि पांढुरना की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता और ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक है।

समय के साथ मंदिर के जीर्णोद्धार और सौंदर्यकरण की आवश्यकता को देखते हुए जनसहयोग से मंदिर समिति द्वारा निर्माण एवं सुधार कार्य निरंतर किए जा रहे हैं। इसी क्रम में नगर के प्रतिष्ठित समाजसेवी, पर्यावरण प्रेमी एवं पांढुरना आदित्य क्लब के अध्यक्ष श्री प्रवीण दशरथसिंह चौहान ने अपनी स्व-निधि से मंदिर के सौंदर्यकरण में सराहनीय योगदान दिया है।
प्रवीण चौहान द्वारा मंदिर में विराजमान माँ चंडिका, भगवान शिव, वीर हनुमान जी एवं नंदी महाराज के लिए राजस्थान ग्रेनाइट से आकर्षक, मजबूत एवं कलात्मक आसनों का निर्माण करवाया गया। इन नवीन आसनों ने मंदिर की भव्यता और आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक मनोहारी बना दिया है। मंदिर में दर्शन हेतु आने वाले श्रद्धालु इस सौंदर्यकरण कार्य को देखकर अत्यंत प्रसन्नता व्यक्त कर रहे हैं तथा प्रवीण चौहान के इस सेवा भाव की सराहना कर रहे हैं।
इस अवसर पर चंडी माता मंदिर समिति एवं विशाल जाम सांवली पदयात्रा समिति ने संयुक्त रूप से समाजसेवी प्रवीण चौहान के प्रति आभार प्रकट किया। समिति के सदस्यों ने कहा कि ऐसे सेवा कार्य न केवल धार्मिक स्थलों की गरिमा बढ़ाते हैं, बल्कि समाज में सेवा, सहयोग और संस्कृति संरक्षण की भावना को भी प्रोत्साहित करते हैं।
समिति ने आगे बताया कि प्राचीन धरोहरों को संरक्षित करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है, और इस दिशा में प्रवीण चौहान जैसे समाजसेवियों का योगदान अत्यंत प्रेरणादायक है। उनके इस कार्य से अन्य लोगों को भी समाजहित और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण के लिए आगे आने की प्रेरणा मिलेगी।
अंत में समिति ने माँ चंडिका से प्रार्थना करते हुए कहा कि उनका आशीर्वाद सदैव प्रवीण चौहान एवं उनके परिवार पर बना रहे और वे इसी प्रकार समाजसेवा के कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाते रहें।